अंधे

शहर के उत्तर में बड़ी टेकडी पर स्थित उस भुतहा महल के बारे में सारा शहर जानता था कि वह जगह ठीक नहीं है पर मैं अज़ीब आदमी हूं , वह काम जरूर करता हूं जिसके लिए मना…

मृत्युगंध

न जाने क्यों कुछ मित्र आपकी परेशानी का सबब होते हुए भी आपको प्यारे लगते हैं ? वे आपको वे बातें कहते हैं जो आप सुनना नहीं चाहते फिर भी आप पुनः पुनः उन्हीं बातों को सुनने उनके…

दर्दे-लंगोट

आज मौसम खुशगवार था। तड़के फिर अच्छी बारिश हुई एवं अभी भी रिमझिम चल रही थी। गत दस दिनों से इन्द्र शहर पर लगातार कृपा बनाये थे वरना सावन सूखा चला जाए एवं भादों न बरसे तो जनजीवन…

स्वीकारोक्ति

धर्म का गौरव प्रतिष्ठित करने वाले राम, पिता के वचन को पूरा करने के लिए, अनुज लक्ष्मण एवं भार्या सीता के साथ राजभवन छोड़कर जाने लगे तो नगर के आबाल-वृद्ध सभी उनके साथ हो लिए । उन सभी…

कशमकश

सारे घर में उस डिब्बे को खोलते ही कोहराम मच गया। आखिर उस डिब्बे में ऐसा क्या था ? गत तीन घण्टे से मुकेश जी के घर आनन्द की फुलझड़ियां फूट रही थी। उनके घर का मुख्य हाॅल…

परिधियों से परे

रात्रि के गहन अंधकार एवं सन्नाटों को चीरती हुई ‘राजधानी एक्सप्रेस’ तेजी से दिल्ली की ओर बढ़ रही थी। इन दिनों हिमाचल में बर्फ पड़ने से राजधानी के इर्दगिर्द सभी स्थानों पर तेज ठण्ड थी।  सुबह के पांच…

परमात्मा नदारद है

तब चारों ओर शून्य था, मात्र शून्य। सर्वत्र अंधेरा था, गहन अंधेरा। परमात्मा ध्यानमग्न, चिर योगनिद्रा में सोया था। समूचे शून्य में मात्र उसके अतिरिक्त और कहीं कुछ भी नहीं था।  सहस्रों वर्षों की योगनिद्रा के पश्चात् परमात्मा…

या में दो न समाय

दिसम्बर की कंपकंपाती ठण्ड में मावठ के दिन आते ही ठण्ड दूनी हो जाती है। हड्डियों के दर्द के चलते बूढ़े इन दिनों बहुत परेशान  हो जाते हैं। बूढ़ी हड्डियों को चलने के लिए सूरज की गर्मी तो…

काज़ीजी की कैरियाँ

मैंने जब काज़ीजी के पड़ौस में मकान खरीदा तब तक काज़ीजी के बरामदे में लगा आम का पेड़ काफी ऊंचा उठ चुका था। मैं जब उनसे पहली बार मिलने गया तो उन्होंने मेरी बड़ी आवभगत की, मुझे मेवों…

कुदरत

चांद को विदा कर सूरज पूर्वी छोर से उठा तो समूचा जगत् क्षणभर में क्रियाशील हो गया। मनुष्य ने सूर्यनमस्कार कर उसका अभिनंदन किया तब भी वह चुप देखता रहा। अन्य सभी तो अपने कार्यों पर लग गए,…

जद जाणूंगी नेह

डग भरती गोडावण ने शकुन दिए तो ठाकुर महेन्द्र प्रताप सिंह को लगा यह बारात प्रस्थान का उचित समय है।  अभी कुछ समय पहले ही उन्होंने गढ़ के प्रथम मंजिल पर स्थित दालान में कुल देवताओं , पितरों…

सूरज पिघल रहा है

जोधपुर शहर के ज्वालाविहार मोहल्ले में स्थित उस बगीचे में आज सुबह कुछ भी नया नहीं था। वही हरे मखमली कालीन की तरह बिछी दूब जिस पर पतली टांगों वाले कुछ पक्षी यहां-वहां फुदक रहे थे, वही चारों…