उगते सूर्य को सभी सलाम करते हैं। सेवा निवृत्ति के पश्चात् महेन्द्र विट्ठल ने इस सत्य को शिद्दत से महसूस किया है। वे बुरा भी नहीं मानते। व्यावहारिक दुनिया के तेल एवं तेल की धार को वे पहचानते…
कायनात
मनुष्य ने इतनी वैज्ञानिक प्रगति कर ली पर वह क्या कभी अपने तनावों पर भी विजय प्राप्त कर सकेगा ? राजेन्द्रबाबू डाइनिंग टेबल से लगी कुर्सी पर बैठे आज इसी उधेड़बुन में खोये थे। वे जब भी तनाव…
खुद्दारी
दिनेश बाबू आज फिर लेट हो गये। दिनेश बाबू सदैव प्रयत्नरत रहते कि ऑफिस समय पर पहुँचे, लेकिन मत्थे चढ़ी गृहस्थी की समस्याएँ अक्सर देरी कर देती। अभी दस रोज पहले ही सेठ अचलनाथ ने उन्हें लताड़ पिलाते…
मेरे चंदा
जाने क्यों एक विचित्र मायूसी इन दिनों जेहन में उतर आई है। खुदा जाने मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ है ? बस यूं ही बात-बेबात उदास रहता हूँ। जीवन के सभी स्वाद इन दिनों फीके लगते हैं। हर…
महायोगी
उसे मैं ‘चिड़ोकला’ कहूँ ‘चिड़कड़ा’ कहूँ ‘चिड़ची’ कहूँ अथवा अन्य कोई संबोधन दूँ, विशेषण कोई हो पर इससे वह नग्न सत्य नहीं बदलने वाला कि वह चिड़चिड़ा था। यह मिलते-झुलते, तरह-तरह के विशेषण तो ऑफिस में इसलिए प्रचलन…
प्रतिनिधि
ज्ञान-वृद्ध सूर्य क्षितिज के उस पार अस्ताचल में उतरने का मन बना ही रहे थे कि सांझ ने छिछोरी चुहिया की तरह बिल से मुँह बाहर निकाला। अवसर मिलते ही वह बाहर आने को यूँ उतावली थी जैसे…
संकल्प
जो पीड़ा पंछी को पंख कटने पर अथवा घोड़े को टांगो से लाचार होने पर होती है, उससे कहीं अधिक पीड़ा का अनुभव आज नलिनी कर रही थी। समय अनुकूल होने पर कदाचित पंछी के नये पंख उग…
सेंध
अभी दो माह पूर्व ही मैंने चौबीस पूरे किये हैं। यह उम्र इतनी बड़ी भी नहीं कि मैं दंभ से कह सकूँ कि मैंने अनेक पापड़ बेले हैं अथवा अनेक दुर्धुर्ष समस्याओं को सुलझाया है लेकिन इतना तो…
समय-रथ
अस्ताचल में उतरने के पूर्व सूर्यदेव कुछ पल के लिए रुके, पूर्वी क्षितिज से पश्चिमी छोर तक के यात्रा-पथ को निहारा, कुछ गंभीर हुए एवं तत्पश्चात् क्षणभर में ओझल हो गए। डूबने से पूर्व आखिर इस मार्ग को…
चार अंगुल नीचे
सभी ग्रह-नक्षत्रों की प्रभा छीनकर सूर्य ने आकाश के पूर्वी छोर पर आधिपत्य किया तो समूचा कुरूक्षेत्र प्रकाश से नहा गया। ऐड देकर उनके सारथी अरुण ने रथ आगे किया तो रथ के पार्श्व भाग में खड़े दिनकर…
तुम कहाँ हो माँ ?
जाने वे कैसे लोग होते हैं जो कुछ नहीं करते एवं सब कुछ पा जाते हैं एवं फिर ताउम्र सबको सीख देते हैं कि सफल होने के यह गुण है, वह गुण हैं। वे लोग भी तो दुनियां…
असल मुनाफ़ा
भोर होते ही सौदागर ने पेड़ से बंधा अपना घोड़ा खोला, उसकी पीठ थपथपायी, दाना-पानी दिया एवं देखते ही देखते पेड़ के पास रखे इत्र के सातों कुप्पे उसकी पीठ पर लाद दिये। कुछ और सामान जैसे दो…