मेरा अनुज ‘कमल’ ऐसे हैरतअंगेज कारनामे करता कि मैं विस्मय से ठगा रह जाता। बचपन में एक बार सिर्फ दो रुपये की शर्त पर मालगाड़ी के नीचे दुबक कर निकल गया। आश्चर्य की बात यह थी कि शर्त…
अमरूद का पेड़
जैसे महाजन अपने बढ़ते धन को देखकर खुश होता है, किसान अपने लहलहाते खेतों को देखकर खुश होता है, माता अपने प्रिय पुत्र को देखकर खुश होती है, नवीनजी अपने बाहर आँगन पर लगे अमरूद के पेड़ को…
पशु-मानव
कादिर भाई, पाॅकिटमार के सितारे इन दिनों ठीक नहीं थे। पिछले पाँच रोज से कोई आमदनी नहीं हुई, एक भी जेब पर हाथ नहीं मार सके। सब दिन होत न एक समान। वैसे उनकी अंगुलियों का कमाल कम…
नसीहत
पंछी हो या मनुष्य सभी को नीड़ की तलाश है। एक ऐसा घरौंदा जिसे हम अपना कह सकें, एक आशियाना जहां हम स्वच्छंदता से आ-जा सके, शांति एवं सुकून से रह सकें, जहाँ हमारी निजता एवं आत्म परितोष…
घुड़सवार
किसी को नीचा दिखाकर दुनिया में कोई ऊँचा नहीं हुआ, फिर भी कुछ लोग स्वभाव से ही टेढ़ी चाल चलते हैं। सरल, शांत और स्थिर पानी में भी जोंक हमेशा वक्र गति से चलती है। कुछ मनुष्यों में…
अगोचर
एडवोकेट सतीश शर्मा को अजमेर शहर में कौन नहीं जानता। न्याय के क्षेत्र में वे एक जाना माना नाम हैं। जो भी उनके सम्पर्क में आता है, चाहे वह जज हो अथवा मुवक्किल, पुलिस अधिकारी हो अथवा अन्य…
आघात
फ्रैण्ड्स काॅलोनी, अलवर की सड़कों पर एक जवान पागल अक्सर घूमता-दौड़ता नजर आता। फटे कपड़े, कृशकाय शरीर एवं बिखरे बाल उसके उन्माद में और इजाफा करते। सर्दी, गर्मी अथवा बारिश, कोई मौसम हो, वो रोज रात ग्यारह बजे…
छोटू उस्ताद
जिस दीये की लौ ईश्वर की कृपा के साये में सुरक्षित हो, उसे कौन बुझा सकता है?‘छोटू उस्ताद’ न तो किसी दाँव-पेच सिखाने वाले पहलवान का नाम है, न ही किसी शहर-मौहल्ले के ऐसे शातिर गुरु का, जिसके…
अंतर्द्वंद्व
बिना मरेे स्वर्ग नहीं मिलता। आखिर मैंने मन कड़ा करके सेठ किशोरीलाल से पचास हजार रुपये रिश्वत के ले ही लिए। सारे कुएँ में जब भांग घुली हुई है तो मेरे एक और भंगेड़ी बन जाने से जगत्…
सम्मोहन
दिनेश की बीमारी को लेकर अंततः जब मुम्बई के सभी नामी डाॅक्टरों ने जवाब दे दिया तो शैलेन्द्रसिंह वर्मा एवं कौशल्या का रोम-रोम काँप उठा। क्या उनके एकमात्र पुत्र को इतना कष्टकर जीवन बिताना होगा? मुम्बई रोगियों की…
ताबीर
आप सही मानें या गलत, मजाक माने या हकीकत, पर मैं अखिल विश्व को साक्षी रखकर कहता हूँ कि मेरा निधन हो चुका था। मैंने स्वयं भी इसकी पुष्टि करने हेतु अपने शरीर की च्योंटी काटने की कोशिश…
क्षत्राणी
जेल अधीक्षक, विश्वेश जोशी से मेरी प्रथम मुलाकात कब हुई, यह तो मुझे नहीं मालूम पर हमारी मित्रता जैसलमेर में ही परवान चढ़ी। शायद युनिवर्सिटी के दिनों में हम पहली बार मिले थे। हम दोनों ने पोस्ट ग्रेजुएशन…